जो रावण कैलाश पर्वत उठाने का दम रखता था वो आखिर क्यों नहीं उठा पाया सीता स्वयंवर का धनुष

  1. रावण बहुत शक्तिशाली और प्रकांड विद्वान व्यक्ति था, उसने एक बार भगवान शिव के निवास स्थल कैलाश को भी उठा लिया था, इतना शक्तिशाली होने के बावजूद आखिर रावण सीता स्वयंवर का शिव धनुष क्यों नही उठा पाया था, ये बात किसी आश्चर्य से कम नही है, तो आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं।
    कैलाश पर्वत को भी उठा लेने वाला रावण आखिर क्यों नहीं उठा पाया सीता स्वयंवर का धनुष, जानिये

     
     

    भगवान शिव का धनुष बहुत ही शक्तिशाली था, उसकी टंकार से बदल फट जाते थे पर्वत हिलने लगते थे, इसी से चले एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियां ध्वस्त हो गयी थी, यह धनुष देवताओं के रजा इंद्र को दिया गया गया था, जिसे बाद में उन्होंने राजा जनक के पूर्वज निमि को दे दिया था, तब से ये धनुष मिथिला में था, जिसे सीता ने एक बार बाल्यकाल में ही खेल खेल में हु उठा लिया था, जिसे देखकर जनक को आश्चर्य हुआ था, इस पर उन्होंने मन ही मन प्रतिज्ञा की कि जो भी इस धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी से सीता का विवाह होगा।

     
     

    फिर सीता के बड़े होने पर राजा जनक ने स्वयंवर रखा, जिसमे एक से बढ़कर शक्तिशाली राजा शामिल हुए, लेकिन कोई भी वह धनुष हिला तक नही पाया, जिसमे महान शक्तिशाली रावण भी शामिल था, जो कैलाश पर्वत भी उठा चुका था, लेकिन राम ने एक झटके में ही धनुष उठा लिया, प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष तोड़ दिया।

     
     

    दरअसल इस बारे में रामचरितमानस में एक चौपाई है कि- उठहु राम भंजहु भव चापा, मेटहु तात जनक परितापा, अर्थात विश्वामित्र ने राम से कहा जाओ राम इस धनुष को उठाओ और जनक की पीड़ा दूर करो, इस चौपाई में एक शब्द है भव चापा जिसका अर्थ है कि इस धनुष को उठाने के लिए शक्ति की नही बल्कि प्रेम की आवश्यकता थी, जबकि रावण और वहां बैठे अन्य राजाओं में अहंकार भरा था, इसीलिए कोई भी उस धनुष को हिला भी नही सका।

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