बच्चों ने कराई अपने 73 साल के पिता और 67 की माँ की शादी, कारण आपको हैरान कर देगा

सुकाल राम को इस बात का मलाल था कि उसकी शादी धूमधाम से और रीति रिवाज के हिसाब से नहीं हुई थी। इसे लेकर गांव में चर्चा था कि मरने के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होगी। लिहाजा गांव वाले और परिवार की रजामंदी से गांव में चल रहे नवधा रामायण स्थल में सबकी सहमति से उसका वरमाला कार्यक्रम हुआ। तेल हल्दी लगाया गया। पूरी तरह से परंपरा का निर्वहन करते हुए शादी रचाई गई, जो पूरे जिले में चर्चा का विषय रहा।

 



कवर्धा के ग्राम खैरझिटी की  इस प्रेम कहानी की शुरुआत 50 साल पहले हुई थी, जब सुकाल राम अपने मित्र के लिए लड़की देखने बेमेतरा जिले के ग्राम बिरसिंघी गए थे। जिस लड़की को देखने गए थे, उसकी छोटी बहन थीं गौतरहीन निषाद, जो सुकाल को पसंद आ गई। लेकिन उस समय सुकाल के परिवार की आर्थिक स्थिती ठीक नहीं थी। लिहाजा दोनों शादी के बंधन में नहीं बंध सके। हालांकि बाद में सुकाल गौतरहीन को बिना शादी किए बीवी मानकर घर ले आया।