बहुत कम लोगों को पता होता है भारतीय राष्ट्रपति के इस चुनाव प्रक्रिया के बारे में

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  • भारत के राष्ट्रपति, राष्ट्र प्रमुख और भारत के प्रथम नागरिक हैं, साथ ही भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख सेनापति भी हैं। संघ के सभी कार्यपालक कार्य उनके नाम से किये जाते हैं। अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालक शक्ति उनमें निहित हैं। सभी प्रकार के आपातकाल लगाने व हटाने वाला, युद्ध/शांति की घोषणा करने वाला होता है।
  • राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्ति होती है पर कुछ अपवादों के अलावा राष्ट्रपति के पद में निहित अधिकांश अधिकार वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद के द्वारा उपयोग किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में रहते हैं, जिसे रायसीना हिल के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रपति अधिकतम दो कार्यकाल तक ही पद पर रह सकते हैं। उनका कार्यालय 5 वर्षो के लिए होता हैं। अब तक केवल पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ही इस पद पर दो कार्यकाल पूरा किये हैं। महामहिम प्रतिभा पाटिल भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभित करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं।
  • भारत में अब तक 14 व्यक्ति राष्ट्रपति का पद ग्रहण कर चुके हैं। भारत में अब तक 15 बार राष्ट्रपति के चुनाव हुए हैं, जिनमें से एक बार, अर्थात् 1977 में, नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गये थे। शेष 14 बार राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक से अधिक उम्मीदवार थे। वर्तमान में राम नाथ कोविन्द भारत के चौदहवें राष्ट्रपति हैं।

राष्ट्रपति पद की योगयता –

  • राष्ट्रपति पद के चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों को कम से कम 50 सांसद या विधायकों की ओर से अनुमोदन मिलना चाहिए। इसके लिए जमानत राशि 15 हजार रुपये की होती है। साथ ही वह भारत का नागरिक हो और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो। इसके आलावा भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन अथवा इन दोनों सरकारों में से किसी के नियन्त्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन लाभ का पद न धारण करता हो।
  • भारत में राष्ट्रपति चुनाव कैसे होता हैं-

 

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  • भारत के राष्ट्रपति का चुनाव अनुच्छेद 55 के अनुसार आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति (सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम) के द्वारा होता है। उपराष्ट्रपति को जहां लोकसभा और राज्यसभा के इलेक्टेड एमपी चुनते हैं, वहीं राष्ट्रपति को इलेक्टोरल कॉलेज चुनता है जिसमें लोकसभा, राज्यसभा और अलग अलग राज्यों के विधायक होते हैं। भारत में राष्ट्रपति का चुनाव यही इलेक्टोरल कॉलेज करता है, जिसमें इसके सदस्यों का प्रतिनिधित्व आनुपातित होता है।
  • सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम क्या हैं –
  • सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम यानी एकल स्थानंतर्णीय प्रणाली में वोटर एक ही वोट देता है, लेकिन वह कई उम्मीदवारों को अपनी प्राथमिकी से वोट देता है। यानी वह बैलेट पेपर पर यह बताता है कि उसकी पहली पसंद कौन है और दूसरी, तीसरी कौन। यदि पहली पसंद वाले वोटों से विजेता का फैसला नहीं हो सका, तो उम्मीदवार के खाते में वोटर की दूसरी पसंद को नए सिंगल वोट की तरह ट्रांसफर किया जाता है। इसलिए इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट कहा जाता है।
  • इलेक्टोरल कॉलेज क्या हैं –
  • राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल जिसे इलेक्टोरल कॉलेज भी कहा जाता है, करता है। संविधान के अनुच्छेद 54 में इसका वर्णन है। यानी जनता अपने राष्ट्रपति का चुनाव सीधे नहीं करती, बल्कि उसके वोट से चुने गए प्रतिनिधि करते हैं। चूंकि जनता राष्ट्रपति का चयन सीधे नहीं करती है, इसलिए इसे परोक्ष निर्वाचन कहा जाता है। इसे ऐसे समझे इलेक्टोरल कॉलेज मतदारों का समूह होता हैं जिन्हें किसी विशिष्ट पद के लिए उम्मीदवार का चुनाव करने हेतु चुना जाता हैं। अक्सर ये विभिन्न संस्थाओं, राजनीतिक दलों या सत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और हर संस्था, राजनीतिक दल या सत्व का किसी विशिष्ट संख्या के मतदारों द्वारा या किसी विशिष्ट तरीके से भारित मतों द्वारा प्रतिनिधित्व होता हैं।
  • राष्ट्रपति चुनाव की परिक्रिया – 
  • राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधान सभाओं के सदस्य अपने-अपने राज्यों की राजधानियों में मतदान करते हैं और संसद सदस्य दिल्ली में या अपने राज्य की राजधानी में मतदान कर सकते हैं। इस चुनाव में सभी प्रदेशों की विधानसभाओं के इलेक्टेड मेंबर और लोकसभा तथा राज्यसभा में चुनकर आए सांसद वोट डालते हैं। लेकिन प्रेजिडेंट की ओर से संसद में नॉमिनेटेड मेंबर वोट नहीं डाल सकते। राज्यों की विधान परिषदों के सदस्यों को भी वोटिंग का अधिकार नहीं है, क्योंकि वे जनता द्वारा चुने गए सदस्य नहीं होते।
  • वोट डालने वाले सांसदों और विधायकों के वोट का प्रमुखता अलग-अलग होती है। इसे वेटेज भी कहा जाता है। दो राज्यों के विधायकों के वोटों का वेटेज भी अलग अलग होता है। यह वेटेज राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय किया जाता है और यह वेटेज जिस तरह तय किया जाता है, उसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था कहते हैं।
  • उदाहरण के तौर पर – आंध्र प्रदेश की कुल जनसंख्या (1971 की जनगणना पर आधारित) – 4,35,02,708
  • वहां एक विधायक के वोट की कीमत निकालने के लिए आंध्र प्रदेश विधानसभा की जनसंख्या को डिवाइड करेंगे कुल विधायकों की संख्या (294) से और इसे 1000 से डिवाइड करेंगे। इसका नतीजा निकलेगा 148।
  • इसी तरह एक एमपी के वोट की कीमत निकालने के लिए सभी राज्यों के विधायकों के वोट को जोड़कर उसे लोकसभा के निर्वाचित 543 और राज्यसभा के निर्वाचित 233 सदस्यों से डिवाइड किया जाता है।

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