रहीम जी के इन दोहो में छीपा है कलयुग का सत्य

  • रहीम कलम और तलवार के धनी थे और मानव प्रेम के सूत्रधार थे।
  • मुस्लिम धर्म के अनुयायी होते हुए भी रहीम ने अपनी काव्य रचना द्वारा हिन्दी साहित्य की जो सेवा की वह अद्भुत है। रहीम की कई रचनाएँ प्रसिद्ध हैं जिन्हें उन्होंने दोहों के रूप में लिखा। उन्होंने ने ऐसे अनेक दोहे लिखे जो किसी के भी सोच बदल सकते है, आइए जानते हैं रहीम के कुछ ऐसे ही दोहों को जो प्रेरणादायी ज्ञानवर्धक होने के साथ ही रोचक भी हैं।

 

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  • 1. “तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
  • कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥”
  • हिन्दी अर्थ: रहीं कहते हैं की वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते हैं और सरोवर भी अपना पानी स्वयं नहीं पीता है। इसी तरह अच्छे और सज्जन व्यक्ति वो हैं जो दूसरों के कार्य के लिए संपत्ति को जमा करते हैं।
  • 2. “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।
  • जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारि॥”
  • हिन्दी अर्थ: रहीम कहते हैं कि बड़ी वस्तु को देख कर छोटी वस्तु को फेंक नहीं देना चाहिए. जहां छोटी सी सुई काम आती है, वहां तलवार कुछ नही कर सकती।
  • 3. “बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।
  • रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय॥”
  • हिन्दी अर्थ: रहीम कहते है की इंसान को हमेशा सोच समझकर व्यवहार करना चाहिए,क्योंकि किसी कारणवश यदि बात बिगड़ जाती है तो फिर उसे बनाना कठिन होता है, जैसे यदि एकबार दूध फट गया तो लाख कोशिश करने पर भी उसे मथ कर मक्खन नहीं निकाला जा सकेगा।
  • 4. “दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
  • जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय॥”
  • हिन्दी अर्थ: रहीम का मानना हैं की दुख में सभी लोग याद करते हैं, सुख में कोई नहीं। यदि सुख में भी याद करते तो दुख होता ही नहीं।
  • 5. “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय।
  • टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय॥”
  • हिन्दी अर्थ: रहीम कहते हैं कि प्रेम का रिश्ता नाज़ुक होता है. इसे झटका देकर तोड़ना उचित नहीं होता. यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर इसे मिलाना कठिन होता है और यदि मिल भी जाए तो टूटे हुए धागों के बीच में गाँठ पड़ जाती है।
  • 6. “समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात।
  • सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछितात॥”
  • हिन्दी अर्थ: रहीम कहते हैं कि सही समय आने पर पेड़ में फल लगता है। झड़ने का समय आने पर वह झड़ जाता है. सदा किसी की अवस्था एक जैसी नहीं रहती, इसलिए दुःख के समय पछताना बेकार है।
  • 7. “वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
  • बांटन वारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग॥”
  • हिन्दी अर्थ: रहीम कहते हैं कि वे लोग धन्य हैं जिनका शरीर सदा सबका उपकार और मदद करता है. जिस प्रकार मेंहदी बांटने वाले के अंग पर भी मेंहदी का रंग लग जाता है, उसी प्रकार परोपकारी का शरीर भी सुंदर रहता है।
  • 8. “रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय।
  • सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी न लेंहैं कोय॥”
  • हिन्दी अर्थ: रहीम कहते हैं की अपने मन के दुःख को मन के भीतर छिपा कर ही रखना चाहिए। दूसरे का दुःख सुनकर लोग इठला भले ही लें, उसे बाँट कर कम करने वाला कोई नहीं होता।

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