क्या होता है ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर

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  • क्या है ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर
  1. अमेरिका की एक वेबसाइट ने इसे परिभाषित किया है। उनके अनुसार ऑबसेसिव लव डिसऑर्डर एक तरह की साइकोलॉजिकल कंडीशन होती है जिसमें लोग जिससे प्यार करते है उस पर कुछ ज्यादा ही मोहित हो जाते है। वह लोग कब प्यार को पागलपन में बदल बैठते हैं उन्हें पता नहीं चलता। ऐसे लोगों को लगता है कि वह जिसके साथ हैं उस व्यक्ति पर सिर्फ उनका हक है। ऐसे में दूसरा व्यक्ति अगर किसी औऱ के साथ हंसता बोलता या करीब आता दिखता है तो लोग पागल हो जाते हैं।
  2. ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर के लक्षणकिसी के प्रति हद से ज्यादा आकर्षित होना और हर समय ऐसा ही महसूस करनाव्यक्ति के प्रति दिन रात सोचना, आने वाले ख्यालों पर किसी तरह का नियंत्रण ना रख पाना दूसरे शख्स को उस शख्स से हमेशा दूर करने की इच्छा रिजेक्शन बर्दाश्त ना करना, ना सुनने पर पागल हो जाना उसके पीछे अपने होश खो बैठना और सारे रिश्ते भूल जाना बार बार मैसेज या कॉल करना, उसका पीछा करना, हर कार्य पर नजर रखना ब्लैकमेल करना, यह ख्वाहिश रखना की वह भी आपको उतना ही प्यार करें.
  • अटैचमैंट डिसऑर्डर
  • ऐसा इस वजह से होता है जब कोई व्यक्ति बचपन या किशोरावस्था में किसी से बहुत लगाव रखता था और वह उससे दूर हो गया हो। ऐसे में यह डर एक बीमारी की तरह मन में बैठ जाता है। अगर कोई व्यक्ति उनकी जिंदगी में आता है और उससे प्यार मिलता है तो खो जाने के डर से लोग सामने वाले की भावनां पर काबू करने लगते हैं।
  • बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर
  • इसे इमोशनली अनस्टेबल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर भी कह सकते हैं। ऐसे लोग अपनी भावनां को खुदी ही नहीं समझ पाते। उनके मन में रिश्तों को लेकर डर की भावना बसी रहती है। इस डिसऑर्डरसे जूझ रहे व्यक्ति को ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • इरोटोमेनिया
  • इसे एक तरह का भ्रम मान सकते हैं। ऐसे में व्यकित एकभ्रम में जीने लगता ह कि वह सामने वाले से प्यार करता है और सामने वाला भी उससे प्यार करता है, जबकि असल में ऐसा होता नहीं है। इससे भी व्यक्ति के पॉजेसिव होने के आसार बढ़ जाते हैं।

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