जिंदगी में जब हार मानने लगे तो याद रखना तुम जीत के बहुत करीब हो

यह मारा छक्का राहुल ने खुशी से झूमते हुए क

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हा तभी उसके दोस्त शुभम हफ्ते हुए आ रहा था कहा राहुल राहुल तुम्हारे चाचा आ रहे हैं वह बहुत गुस्से में है

शुभम यह कह ही रहा था कि उसके चाचा हां टपके और वही सबके सामने लगे राहुल को पीटने

यह देख राहुल के सब दोस्त छोड़कर भाग गए

राहुल कपसते हुवे रोते हुए चाचा चाचा माफ कर दो चाचा आज के बाद कभी क्रिकेट नहीं खेलूंगा

लेकिन वह कहां मानने वाले थे वह बेरहमी से पीटते रहे और उसे घसीटते हुए घर ले गए

,,,कितनी बार मना किया था मैंने तुझको नालायक यह कहते हुए उन्होंने राहुल के बैट तोड़ दी

राहुल चिल्लाते हुए :नहीं चाचा नहीं
राहुल को बहुत बड़ा सदमा लगा

क्योंकि जो उसके अकेलापन का सहारा था वह थी उसकी बैट और बॉल वह भी उसके चाचा ने तोड़ के जला दी

राहुल स्कूल में जीरो लेकिन अपने दोस्तों की नजर में हीरो था वह सबको हंसाता और किसी भी मायूस चेहरे मैं  खुशी ले आता लोग सोचते कि वह बहुत खुश है लेकिन उसके हंसते हुए चेहरे के पीछे कितना दर्द है यह उस से बेहतर कोई नहीं जानता

क्योंकि इससे पहले कि उसके होश संभलते हैं उसके
पिताजी गुजर चुके थे उसकी मां और उसकी एक छोटी बहन उनके चाचा ही के घर में रहते
यह बैट बॉल जो उसके अकेलेपन का सहारा था अब वह भी ना रहा

वह हर दिन अपने चाचा के ताने सुनता और उनकी दुकान में काम करता वह अपना दर्द किसी को देखने नहीं देता झूठी मुस्कान हमेशा उसके चेहरे पर बनी रहती

हमेशा सोचता कि वह आगे जाकर कुछ करेगा लेकिन घर की परिस्थिति कारण निराश हो जाता लेकिन उसने हार नहीं माना वो काम भी करता पढ़ाई भी करता हर एक दिन क्रिकेट की दुनिया में महान रूप से उभर कर आया

इसीलिए कभी हार नहीं माननी चाहिए दोस्तों

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