चुनावी मुद्दा बनने की आशंका ने लिखी बेदी की विदाई की पटकथा

 

पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी को अचानक बर्खास्त कर भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मुद्दाविहीन बनाने की कोशिश की है।

दरअसल भाजपा नहीं चाहती थी कि कुछ महीनों बाद राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बेदी को चुनावी मुद्दा बनाए। इसके अलावा पार्टी की दो सहयोगी एआईएनआरसी के साथ अन्नाद्रमुक भी बेदी से मुक्ति चाहती थी।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक पुडुचेरी में इस समय नारायणसामी सरकार और कांग्रेस के खिलाफ माहौल है। कांग्रेस इस माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए बेदी की कार्यशैली को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही थी।

बीते कुछ वर्षों में बेदी और राज्य सरकार के बीच कई मुद्दों पर लगातार टकराव की स्थिति बनी है। भाजपा को डर था कि अगर कांग्रेस बेदी को चुनावी मुद्दा बनाने में कामयाब हुई तो राज्य सरकार इसी बहाने अपनी नाकामियों को छिपा लेगी।

इसके अलावा आगामी चुनाव में भाजपा का एआईएनआरसी और अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन होना है। ये दोनों ही दल बेदी के धुर विरोधी रहे हैं। दोनों दलों के नेताओं ने भाजपा नेतृत्व से कई बार बेदी की शिकायत की थी। फिर राज्य की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि वहां कभी भी राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। बेदी को हटाए बिना राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद वहां विधानसभा चुनाव कराने से बेदी अपने आप चुनावी मुद्दा बन जाती।

यही कारण है कि केद्रीय स्तर पर अचानक बेदी का तबादला करने के बदले उन्हें बर्खास्त करने का फैसला किया गया। जिससे यह संदेश जाए कि भाजपा भी बेदी की कार्यशैली से खुश नहीं थी। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि बेदी को बर्खास्त करने के बाद अब कांग्रेस उन्हें अपना मुद्दा नहीं बना पाएगी।

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