जम्मू-कश्मीरः विदेशी राजनयिकों ने घाटी में बदलाव की हकीकत का लिया जायजा, आज उप राज्यपाल से मुलाकात

 

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए हटने और जिला विकास परिषद चुनाव के बाद यहां पहुंचे 24 सदस्यीय विदेशी राजनयिकों के दल ने बदलाव की जमीनी हकीकत को समझा। बडगाम पहुंचे दल ने विकास के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में न सिर्फ जानकारी ली, बल्कि नवनिर्वाचित जिला विकास परिषद अध्यक्ष व सरपंचों से यह भी जाना कि वह काम कैसे करते हैं।

दो दिवसीय दौरे पर आया यह दल वीरवार को जम्मू में रहेगा, जहां उप राज्यपाल से भी मुलाकात करेगा। इस दल में 20 यूरोपीय व अफ्रीकी देशों के राजनयिक शामिल हैं। कोरोना संकट शुरू होने के बाद यह पहला दल है जो जम्मू-कश्मीर के दौरे पर पहुंचा है। राजनयिकों की आज जम्मू-कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश के साथ भी मुलाकात है। दल को सेना और पुलिस के कामकाज के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। 

बुधवार सुबह करीब 9.30 बजे श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एयर-इंडिया की विशेष उड़ाने से यहां पहुंचा राजनयिकों का दल कड़ी सुरक्षा के बीच सीधा बडगाम के मागाम डिग्री कॉलेज पहुंचा। यहां जिला विकास परिषद (डीडीसी) के प्रतिनिधियों से मौजूदा जमीनी स्थिति के बारे में जानकारी हासिल की।

इन सदस्यों ने जमीनी स्तर की राजनीति को मजबूत करने और उसके सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार का आभार प्रकट किया। इस दौरान जिले के डीडीसी चेयरमैन नजीर अहमद खान ने उन्हें स्थानीय विकास की आवश्यकताओं के बारे में जानकारी दी। राजनयिकों ने डिग्री कॉलेज में लगाए गए हॉर्टिकल्चर व अन्य विभागों के स्टॉल का भी दौरा किया। यहां प्रतिनिधियों का परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया। 

श्रीनगर में जन प्रतिनिधियों से की मुलाकात 

मागाम से निकलने के बाद यह दल करीब 12.45 बजे सीधा श्रीनगर के ग्रैंड ललित होटल पहुंचा जहां उन्होंने दोपहर के खाने पर स्थानीय निकाय के चुने गए प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इसमें श्रीनगर के मेयर जुनैद मट्टू और पीडीपी नेता मुज्फ्फर हुसैन बेग की पत्नी और बारामुला से डीडीसी चेयरमैन सफीना बेग भी शामिल थीं। 

हजरतबल के इतिहास से हुए रूबरू

प्रतिनिधियों का यह दल दोपहर करीब 3.30 बजे श्रीनगर की हजरतबल दरगाह के लिए रवाना हुआ। वहां पहुंचने पर वहां के प्रमुख ने इस दल को दरगाह की धार्मिक महत्ता और इतिहास से रूबरू कराया गया।

सिविल सोसाइटी के लोगों से मिले

हजरतबल दरगाह में करीब आधा घंटा बिताने के बाद यह दल सीधा शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसी) पहुंचा जहां उन्होंने सिविल सोसाइटी के लोगों से मुलाकात कर कश्मीर की मौजूदा जमीनी स्थिति को जानने की कोशिश की।

अफसरों ने बदलाव की दी जानकारी

देर शाम होटल में प्रतिनिधि मंडल को प्रदेश के पुलिस और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के आला अधिकारियों ने उन्हें यहां के हालात में आ रहे बदलाव और विकास कार्यों के बारे में जानकारी दी।

दुश्प्रचार को मुंहतोड़ जवाब

सूत्रों के मुताबिक जम्मू- कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद से भारत की कश्मीर के प्रति नीतियों को लेकर पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंच पर दुष्प्रचार किया जा रहा है। राजनयिकों का यह दौरा इससे निपटने का कूटनीतिक प्रयास है। ताकि दुनिया यहां से लौटकर राजनयिक डीडीसी चुनावों और 4जी बहाली के बाद के असली कश्मीर की हकीकत दुनिया को बताएं। 

अगस्त 2019 के बाद चौथा विदेशी प्रतिनिधि मंडल

बता दें कि यूरोपीय देशों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अक्तूबर 2019 में कश्मीर का दो दिवसीय दौरा किया था। इसके बाद पिछले साल 9 जनवरी को नई दिल्ली स्थित अमेरिकी राजदूत समेत 16 विदेशी राजनयिकों ने यहां का दौरा किया था, जबकि विदेशी राजनयिकों के एक अन्य 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 12 फरवरी 2020 को भी कश्मीर का दौरा किया था। इस प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी, कनाडा, फ्रांस और अफगानिस्तान के राजनयिक शामिल थे।

बीस देशों के राजनयिक शामिल

जम्मू कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे इस दल में चिली, ब्राजील, क्यूबा, बोलविया, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, आयरलैंड, नीदररलैंड, पुर्तगाल, बेल्जियम, स्पेन, स्वीडन, इटली, बांग्लादेश, मालवी, एरिट्रिया, किटो डि आयवर, घाना, सेनेगल, मलयेशिया, तजाकिस्तान, किर्गिस्तान और यूरोपियन यूनियन के राजनियक शामिल हैं। 

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