शिवसेना का बीजेपी पर पलटवार, सामना में पूछा एम्स दहशत फैला रहा है क्या ?

माहाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामले के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठकरे ने साफ तौर पर यह निर्देश दिया है कि लोग अनुशासन और नियमों का पालन करें. उन्होंने कहा कि राज्य में ‘लॉकडाउन’ लगाना है या नहीं, इसका निर्णय अगले 8 दिनों में लिया जाएगा। वहीं इस मसले पर राज्य में सियासत भी तेज हो गई है। विधान परिषद में विरोधी पक्ष नेता प्रवीण दरेकर ने कहा था कि राज्य में लोगों के बीच दहशत का माहौल तैयार मत करो। जुल्म करनेवाले शासक जैसे कार्य मत करो।’ इस पर शिवसेना ने पलटवार किया है।शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में बीजेपी पर निशाना साधा है। सामना ने अपने सम्पादकीय में लिखा है कि एम्स’ मतलब महाविकास अघाड़ी का घटक दल नहीं है। यह महाराष्ट्र के विपक्ष को समझ लेना चाहिए। पुन: लॉकडाउन टालना होगा तो लोगों को जिम्मेदारी से बर्ताव करना होगा। विपक्ष को भी जिम्मेदारी का भान रखना चाहिए। विपक्ष वालों कम-से-कम कोरोना संकट में तो संभलकर बर्ताव करो, बोलो। राजनीति करने के लिए पूरी जिंदगी पड़ी है।


राज्य में कोरोना की दूसरी लहर धावा बोल रही है इसलिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सार्वजनिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि लोग अनुशासन और नियमों का पालन करें। राज्य में ‘लॉकडाउन’ लगाना है या नहीं, इसका निर्णय अगले 8 दिनों में लेंगे। ‘मास्क पहनो, नियमों का पालन करो और लॉकडाउन टालो’ ऐसा आह्वान मुख्यमंत्री ने किया।

पाबंदियां शिथिल किए जाने के बाद से कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है,  परंतु मुख्यमंत्री द्वारा ‘लॉकडाउन’ से संबंधित चेतावनी दिए जाते ही विपक्ष के नेता दरेकर ने अलग ही बयान दिया, ‘राज्य में लोगों के बीच दहशत का माहौल तैयार मत करो। जुल्म करनेवाले शासक जैसे कार्य मत करो।’ 


कोरोना संक्रमण की वास्तविक स्थिति बयां करना, इसे दहशत फैलाना कहा जाए क्या? महाराष्ट्र में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन के अधिक घातक होने की जानकारी ‘एम्स’ के संचालक  ने दी है। इस नए स्ट्रेन के कारण ‘हार्ड इम्युनिटी’ हासिल करना और मुश्किल होने की आशंका और इससे पहले कोरोना के एंटीबॉडीज तैयार हुए व्यक्तियों में भी पुन: कोरोना का संक्रमण होने का खतरा  डॉ. गुलेरिया ने जताया है ‘एम्स’ के संचालक देश को गुमराह कर रहे हैं, ऐसा महाराष्ट्र में भाजपा के नेताओं को लगता होगा तो उन्हें दिल्ली में जाकर ‘एम्स’ की चौखट पर जोरदार आंदोलन करना चाहिए। 


लॉकडाउन के कारण छोटे व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, मेहनतकश मजदूरों की कमर टूटेगी इतना तय है। आर्थिक व्यवस्था भी धराशायी होगी ही। इसका रास्ता निकालना होगा व केंद्र को इस कार्य में मदद करने की आवश्यकता है। महाराष्ट्र जैसे राज्य को इस कार्य के लिए केंद्र से कोई विशेष आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए। 


आज लॉकडाउन अथवा कोरोना के कारण आर्थिक कमर टूट गई है। उसी तरह से कमर नोटबंदी के पर्व में भी टूटी ही थी। कोरोना संकट में लोगों के जीवन की रक्षा करना ही महत्वपूर्ण है इसलिए विरोधी पक्ष क्या कहेगा इसकी चिंता किए बगैर मुख्यमंत्री ने कठोर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। 


‘एम्स’ जैसे सर्वोच्च चिकित्सा संस्थान ने खतरे की आशंका से अवगत कराया है। ‘एम्स’ मतलब महाविकास आघाड़ी का घटक दल नहीं है। यह महाराष्ट्र के विपक्ष को समझ लेना चाहिए। पुन: लॉकडाउन टालना होगा तो लोगों को जिम्मेदारी से बर्ताव करना होगा।  विपक्ष वालों कम-से-कम कोरोना संकट में तो संभलकर बर्ताव करो, राजनीति करने के लिए पूरी जिंदगी पड़ी है।


Comments are closed.