पलट कर जवाब देना बेशक गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदें भूल जाते हैं

शतरंज सी जिन्दगी में कौन किसका मोहरा है आदमी एक है मगर सबका किरदार दोहरा है

पलट कर जवाब देना बेशक गलत बात है

लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदें भूल जाते हैं ।

पढ़िए सबक़ यही है वफ़ा की किताब का

काँटे करा रहे हैं तआरुफ़ गुलाब का.

शतरंज सी जिन्दगी में कौन किसका मोहरा है

आदमी एक है मगर सबका किरदार दोहरा है।

मुझे भी शामिल करो गुनहगारों की महफ़िल में

मैं भी क़ातिल हूँ मैंने भी अपनी ख्वाहिशों को मारा है ।

नसीब बिगड़ा तो गूंगे बुराई करने लगे

हमारे कद के बराबर नहीं आ सके जो लोग

तो हमारे पैरों के नीचे खुदाई करने लगे ।

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