चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो, सांसों में मेरी खुशबु बनके बिखर जाते हो

चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो,

सांसों में मेरी खुशबु बनके बिखर जाते हो,

कुछ यूँ चला है तेरे इश्क का जादू,

सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो।

 

हमतो बस खोये ही रहतें हैं उनके ख्यालों में, पता ही नही चलता कब दिन कब रात होती है

 

दूर बैठे रहोगे, पास न आओगे कभी !

ऐसे रूठोगे तो जान ले जाओगे कभी !

शोले बन जायेगें सभी फूल मेरे आंचल के !

तुम जो मोहब्बत की घटा बनके न छाओगे कभी

 

 

जब खामोश निगाहों से बात होती है,

तो ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है,

हमतो बस खोये ही रहतें हैं उनके ख्यालों में,

पता ही नही चलता कब दिन कब रात होती है।

Comments are closed.