ख़सारे पर ख़सारे का बजट तय्यार होता है । मईशत की तरक़्क़ी का मगर प्रचार होता है

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पढ़िए दिल खुश करने वाली बातें और शायरियां Part-341

ख़सारे पर ख़सारे का बजट तय्यार होता है ।

मईशत की तरक़्क़ी का मगर प्रचार होता है ।

तिजारत जिस तरह बाज़ार में करता है पंसारी ।

अदब में भी वही दिन रात कारोबार होता है ।

अगर मरने की ठानी है तो क्या सोचा है ये तुम ने ।

गिरानी में कफ़न मिलना बहुत दुश्वार होता है

मियाँ जाते तो हो सर पर लिए फ़रियाद की गठरी ।।

पता भी है तुम्हें थाने में थानेदार होता है ।

गिले शिकवे से क्या हासिल कि दौर-ए-बे-उसूली में ।

जो चलता है उसूलों पर ज़लील-ओ-ख़्वार होता है ।

निगाहों में जो मंज़र हो वही सब कुछ नहीं होता ।

बहुत कुछ और भी प्यारे पस-ए-दीवार होता है ।

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