​मैं अल्फाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ​,मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ

गुनाह करके सजा से डरते हैं,ज़हर पी के दवा से डरते हैं,

दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं हमें,हम तो दोस्तों के खफा होने से डरते है।

 

ये न समझ कि मैं भूल गया हूँ तुझे,तेरी खुशबू मेरे सांसो में आज भी है।

शायद फिर हमें वो तकदीर मिल जाये,जीवन के वो हसीं पल फिर मिल जाये,

चल फिर से बैठें क्लास की लास्ट बैंच पे,शायद फिर से वो पुराने दोस्त मिल जाये।

मोहब्बत करना कोई हमसे सीखे,जिसे टूटकर चाहा वो अबतक बेखबर है,

मैं खुद पहल करूँ या उधर से हो इब्तिदा,बरसों गुज़र गए हैं यही सोचते हुए।

 

 

मजबूरियों ने निभाने न दी मोहब्बत,सच्चाई मेरी वफाओं में आज भी है।

​मैं अल्फाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ​,मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ​,

कब पूछा मैंने ​कि ​क्यूँ दूर हो मुझसे​,मैं दिल रखता हूँ तेरे हालात समझता हूँ​।

 

 

​मैं ​दीवाना हूँ तेरा मुझे इंकार नहीं​,कैसे कह दूं कि मुझे तुमसे प्यार नहीं,

कुछ शरारत तो तेरी नज़रों में भी थी,मैं अकेला ही तो इसका गुनहगार नहीं।

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