विभीषण रावण के साथ रहकर भी नहीं बिगड़ा, और कैकेयी राम के साथ रहकर भी नहीं सुधरी !

 

कड़वी सच्चाई : बुरा हंमेशा वही बनता है, जो अच्छा बनकर टूट चुका होता है

संगत से इन्सान के स्वभाव पर कोई फर्क नहीं पड़ता,

क्यूंकि विभीषण रावण के साथ रहकर भी नहीं बिगड़ा,

और कैकेयी राम के साथ रहकर भी नहीं सुधरी !!

आज आप जहाँ भी है या कल जहाँ भी होंगे,

इसके लिए आप किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते !!

 

एक खुबसूरत दिल हजार खुबसूरत

चहेरों से ज्यादा बेहतर होता है,

इसलिए जिन्दगी में हंमेशा ऐसे लोग चुनो,

जिनका दिल चहेरे से ज्यादा खुबसूरत हो !!

जब हम विकट परिस्थिति से गुजर रहे होते है,

और प्रभु को मौन पाते है तो हमें याद रखना चाहिए

की परीक्षा के दौरान शिक्षक सदैव मौन ही रहते है !!

 

अन्याय और अत्याचार करने वाला,

उतना दोषी नहीं माना जा सकता,

जितना की उसे सहन करने वाला !!

किसीकी अच्छाई का इतना भी

फायदा मत उठाओ की

वो बुरा बनने के लिये मजबूर बन जाये,

बुरा हंमेशा वही बनता है

जो अच्छा बनकर टूट चुका होता है !!

 

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