इश्क़ की मंज़िल नहीं होती,बस सफ़र ही ख़ूबसूरत होता है

ज़िन्दगी की खरोचों से ना घबराइये ज़नाब,तराश रही है खुद जिंदगी निखर जाने को,

तेरी आँखों की कशिश भी खींचती है इस कदर,ये दिल सिर्फ बहलता नहीं बहक जाने की।

मेरी दुनिया में आया एक मुसाफिर ऐसे,कोई पहले की जान पहचान हो जैसे।

ऐ दोस्त जब भी तू उदास होगा,मेरा ख्याल तेरे आस-पास होगा,

दिल की गहराईयों से जब भी करोगे याद हमें,तुम्हें.. हमारे करीब होने का एहसास होगा।

नतीजा बेवजह महफिल से उठवाने का क्या होगा,

न होंगे हम तो साकी तेरे मैखाने का क्या होगा।

बहाना कोई तो दे ए जिन्दगी,की मैं जीने को मजबूर हो जाऊं,

इश्क़ की मंज़िल नहीं होती,बस सफ़र ही ख़ूबसूरत होता है।

एक तरफा ही सही प्यार तो प्यार है,उसे हो ना हो लेकिन मुझे बेशुमार है,

काश एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर,वो आकर गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर।

सुकून चेहरे पे हर ख़ुश अदा के रक्खे थे ।समुंदरों ने भी तेवर छुपा के रक्खे थे,

मिरी उम्मीद का सूरज कि तेरी आस का चाँद ।दिए तमाम ही रुख़ पर हवा के रक्खे थे।

मेरी दुनिया में आया एक मुसाफिर ऐसे,कोई पहले की जान पहचान हो जैसे,

मिले हम उनसे और वो हुमसे कुछ इस तरहा से,कोई बरसों से बिछड़े हुए हों जैसे।

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