दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद, वो जख्म कैसे दिखाए जो दिखते नहीं

फूल खिलतें हैं बहारों का समा होता है,

ऐसे मौसम में ही तो प्यार जमा होता है।

दिल की बातें होठों से नही कहते हैं,

ये फसाना तो निगाहों से बयां होता है।

 

गुड मॉर्निंग : न जाने सालों बाद कैसा समां होगा, हम सब दोस्तों में से कौन कहां होगा

दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद,

वो जख्म कैसे दिखाए जो दिखते नहीं।

 

न जाने सालों बाद कैसा समां होगा,

हम सब दोस्तों में से कौन कहां होगा।

फिर अगर मिलना होगा तो मिलेंगे ख्वाबों मे,

जैसे सूखे गुलाब मिलते है किताबों में।

 

ऐसा नहीं कि राह में रहमत नहीं रही,

पैरों को तेरे चलने की आदत नहीं रही।

कश्ती है तो किनारा नहीं है दूर,

अगर तेरे इरादों में बुलंदी बनी रही।

 

मुझसे रूठना मत मुझे मनाना नहीं आता,

मुझसे दूर मत जाना प्यार से मुझे वापस बुलाना नहीं आता।

 

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