की वो देख रहा था आसमान में तारों की तरफ, एक पल में ही जैसे किसी ने चाँद चुरा लिया

1. की वो देख रहा था आसमान में तारों की तरफ, एक पल में ही जैसे किसी ने चाँद चुरा लिया।

की वो देख रहा था आसमान में तारों की तरफ, एक पल में ही जैसे किसी ने चाँद चुरा लिया

2. दर्द तो अकेले ही सहते है सभी, भीड़ तो बस फर्ज अदा करती है, सुनकर ज़माने की बाते तू अपनी अदा मत बदल, यकीन रख अपने खुदा पर, यूँ बार बार खुदा मत बदल।

3. मुसीबतों से ही निखरती है शख्सियत इंसान की साहिब, जो चट्टानों से न उलझे वो झरना किस काम का बाँध कर रख ली है मैंने अपनी आँखों में ख़ुशबू तेरी, अब महका सा रहता हूं मैं भी किसी गुलशन की तरह।

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